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TROPIC OF CANCER IN MP 14 DIST.

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फुकुशिमा दाइची परमाणु बिजली संयंत्र त्रासदी 2011 जापान

फुकुशिमा दाइची परमाणु बिजली संयंत्र   त्रासदी  2011 जापान 11 मार्च 2011 की दोपहर 2:46 ( जापान स्थानीय समय) पर शुरू हुई. पूर्वी प्रायद्वीप ओशिका से 70 किलोमीटर दूर रिक्टर पैमाने पर नौ तीव्रता वाला भूकंप उठा.  इस   भूकंप का केंद्र 24  किलोमीटर की गहराई पर था. इतने तेज भूकंप ने पूर्वोत्तर जापान को थरथरा दिया. सुनामी  के चलते बहुत से बिजली घरों में विद्युत उत्पादन ठप हो गया है और जापान में कम से कम दो  परमाणु बिजलीघरों से रेडियोधर्मी विकिरण का खतरा पैदा हो गया करीब 20 मिनट बाद सूनामी लहरें उत्तर के होककाइदो और दक्षिण के ओकीनावा द्वीप से  टकराई और वहां भारी तबाई मची. इसके बाद विशाल सुनामी लहरें फुकुशिमा दाइची परमाणु  बिजली संयंत्र में घुसीं. परमाणु संयंत्र में समुद्र का नमकीन पानी घुसने से रिएक्टर पिघलने  लगे और धमाके होने लगे. संयंत्र से भारी मात्रा में रेडियोधर्मी तत्व लीक होने लगे और  परमाणु विकिरण होने लगा 15,000 से ज्यादा लोग मारे गए. नेशनल पुलिस एजेंसी के मुताबिक 2,000 से ज्यादा लो...

cencus 2011 part2

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Population india 2011 /Census of India 2011

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स्थापत्य कला तीर्थ खजुराहो

  स्थापत्य  कला तीर्थ खजुराहो खजुराहो   भारत  के  मध्य प्रदेश   प्रान्त  में स्थित एक प्रमुख शहर है  खजुराहो को प्राचीन काल में 'खजूरपुरा' और 'खजूर वाहिका' के नाम से भी जाना जाता था।   जो अपने प्राचीन एवं मध्यकालीन मंदिरों के लिये विश्वविख्यात है। यह मध्य प्रदेश के  छतरपुर  जिले में स्थित है। यहां बहुत बड़ी संख्या में प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिर हैं। मंदिरों का शहर खजुराहो पूरे विश्व में मुड़े हुए पत्थरों से निर्मित मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। खजुराहो को इसके अलंकृत मंदिरों की वजह से जाना जाता है जो कि देश के सर्वोत्कृष्ठ मध्यकालीन स्मारक हैं। भारत के अलावा दुनिया भर के आगन्तुक और पर्यटक प्रेम के इस अप्रतिम सौंदर्य के प्रतीक को देखने के लिए निरंतर आते रहते है।  हिन्दू   कला  और  संस्कृति  को शिल्पियों ने इस शहर के पत्थरों पर मध्यकाल में उत्कीर्ण किया था।                                   खजुराहो का इतिहास लगभग एक हजार स...

भीमबेटका (भीमबैठका)

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भीमबेटका BHEEMBETKA भीमबेटका  (भीमबैठका)  भारत  के  मध्य प्रदेश  प्रान्त के  रायसेन जिले  में स्थित एक  पुरापाषाणिक  आवासीय शैलाश्रयों पुरास्थल है। यह आदि-मानव द्वारा बनाये गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रों को  पुरापाषाण काल  से  मध्यपाषाण काल  के समय का माना जाता है। ये शैलाश्रयों चित्र  भारतीय उपमहाद्वीप  में मानव जीवन के प्राचीनतम चिह्न हैं। यह स्थल मध्य प्रदेश की राजधानी  भोपाल  से ४५ किमी दक्षिणपूर्व में  रायसेन जिले  स्थित है। इनकी खोज वर्ष  १९५७- १९५८  में डॉक्टर  विष्णु श्रीधर वाकणकर  द्वारा की गई थी। भीमबेटका क्षेत्र को  भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ,  भोपाल मंडल  ने  अगस्त   १९९०  में राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल घोषित किया। इसके बाद  जुलाई   २००३  में  यूनेस्को  ने इसे  विश्व धरोहर स्थल  घोषित किया। यहाँ 600 शैलाश्रय हैं जिनमें 275 शैलाश्रय चित्रों द्वारा सज्जित हैं।...

हेलिओडोरस स्तंभ (Heliodorus pillar)

हेलिओडोरस स्तंभ ( Heliodorus pillar) भारत   में   मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में आधुनिक बेसनगर के पास स्थित पत्थर से निर्मित प्राचीन स्तम्भ है। इसका निर्माण ११० ईसा पूर्व हेलिओडोरस (Heliodorus) ने कराया था जो भारतीय - यूनानी राजा एण्टिआल्कीडस (Antialcidas) का शुंग राजा भागभद्र के दरबार में दूत था।   स्तम्भ साँची के स्तूप से केवल 6 मील की दूरी पर स्थित है। यह स्तंभ लोकभाषा में खाम बाबा के रूप में जाना जाता है। एक ही पत्थर को काटकर बनाया गया , यह स्तंभ ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्तंभ पर पाली भाषा में ब्राम्ही लिपि का प्रयोग करते हुए एक अभिलेख मिलता है। यह अभिलेख स्तंभ इतिहास बताता है। नवें शुंग शासक महाराज भागभद्र के दरबार में तक्षशिला के यवन राजा एण्टिआल्कीडस की ओर से दूसरी सदी ई . पू . हेलिओडोरस नाम का राजदूत नियुक्त हुआ। इस राजदूत ने वैदिक धर्म की व्यापकता से प्रभावित होकर भागवत धर्म स्वीकार कर लिया। उसी ने ...